मुख्य रूप से जब दी गई सूचना से Cognizable Offence (संज्ञेय अपराध) का पता चलता है।
उदाहरण के लिए, मामले के तथ्यों और लागू धाराओं के अनुसार हत्या, बलात्कार, डकैती, गंभीर चोट आदि जैसे अपराध संज्ञेय हो सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 2025 के एक निर्णय में स्पष्ट किया कि यदि दी गई सूचना, उसे सही मानकर देखने पर, संज्ञेय अपराध बनाती है तो सामान्यतः FIR दर्ज करना अनिवार्य है, हालांकि BNSS धारा 173(3) में कुछ 3 से 7 वर्ष तक दंडनीय संज्ञेय अपराधों के लिए विशेष preliminary enquiry का प्रावधान है।
